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भीष्म पर्व
अध्याय ३१
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श्रीभगवानु उवाच
क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति |  ३१   क
कौन्तेय़ प्रतिजानीहि न मे भक्तः प्रणश्यति ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति