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शान्ति पर्व
अध्याय २६०
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स्यूमरश्मिरु उवाच
स्वर्गकामो यजेतेति सततं श्रूय़ते श्रुतिः |  १८   क
फलं प्रकल्प्य पूर्वं हि ततो यज्ञः प्रताय़ते ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति