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शान्ति पर्व
अध्याय १९२
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व्राह्मण उवाच
यतो धर्मस्ततः सत्यं सर्वं सत्येन वर्धते |  ६९   क
किमर्थमनृतं कर्म कर्तुं राजंस्त्वमिच्छसि ||  ६९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति