भीष्म पर्व  अध्याय २५

श्रीभगवानु उवाच

कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादय़ः |  २०   क
लोकसङ्ग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति