आदि पर्व  अध्याय ६७

वैशम्पाय़न उवाच

त्वय़ाद्य राजान्वय़या मामनादृत्य यत्कृतः |  २५   क
पुंसा सह समाय़ोगो न स धर्मोपघातकः ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति