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वन पर्व
अध्याय १९२
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मार्कण्डेय़ उवाच
त्वय़ा देव प्रजाः सर्वाः सदेवासुरमानवाः |  ११   क
स्थावराणि च भूतानि जङ्गमानि तथैव च |  ११   ख
व्रह्म वेदाश्च वेद्यं च त्वय़ा सृष्टं महाद्युते ||  ११   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति