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शान्ति पर्व
अध्याय ८५
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वृहस्पतिरु उवाच
अदाता ह्यपि भूतानां मधुरामीरय़न्गिरम् |  ८   क
सर्वलोकमिमं शक्र सान्त्वेन कुरुते वशे ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति