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वन पर्व
अध्याय ५
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धृतराष्ट्र उवाच
एतद्वाक्यं विदुर यत्ते सभाय़ा; मिह प्रोक्तं पाण्डवान्प्राप्य मां च |  १६   क
हितं तेषामहितं मामकाना; मेतत्सर्वं मम नोपैति चेतः ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति