उद्योग पर्व  अध्याय १९२

भीष्म उवाच

तत्प्रविश्य शिखण्डी सा द्रुपदस्यात्मजा नृप |  २२   क
अनश्नती वहुतिथं शरीरमुपशोषय़त् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति