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उद्योग पर्व
अध्याय १९२
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भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा द्रुपदो यज्ञसेनः; सर्वं तत्त्वं मन्त्रविद्भ्यो निवेद्य |  ५   क
मन्त्रं राजा मन्त्रय़ामास राज; न्यद्यद्युक्तं रक्षणे वै प्रजानाम् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति