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अनुशासन पर्व
अध्याय १३७
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अर्जुन उवाच
तं राजा कस्त्वमित्याह ततस्तं प्राह मारुतः |  २४   क
वाय़ुर्वै देवदूतोऽस्मि हितं त्वां प्रव्रवीम्यहम् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति