वन पर्व  अध्याय २०

वासुदेव उवाच

एवमुक्तस्तु कौन्तेय़ सूतपुत्रस्तदा मृधे |  १   क
प्रद्युम्नमव्रवीच्छ्लक्ष्णं मधुरं वाक्यमञ्जसा ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति