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आदि पर्व
अध्याय ५७
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वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेभ्योऽपि पञ्चभ्यः कृष्णाय़ां पञ्च जज्ञिरे |  १०१   क
कुमारा रूपसम्पन्नाः सर्वशस्त्रविशारदाः ||  १०१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति