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अनुशासन पर्व
अध्याय ५४
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भीष्म उवाच
त्रैलोक्यराज्यादपि हि तप एव विशिष्यते |  २६   क
तपसा हि सुतप्तेन क्रीडत्येष तपोधनः ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति