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उद्योग पर्व
अध्याय १९३
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भीष्म उवाच
स तद्गृहस्योपरि वर्तमान; आलोकय़ामास धनाधिगोप्ता |  ३१   क
स्थूणस्य यक्षस्य निशाम्य वेश्म; स्वलङ्कृतं माल्यगुणैर्विचित्रम् ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति