आदि पर्व  अध्याय १९४

कर्ण उवाच

जातपक्षा विदेशस्था विवृद्धाः सर्वशोऽद्य ते |  ४   क
नोपाय़साध्याः कौन्तेय़ा ममैषा मतिरच्युत ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति