menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय १९४
chevron_left
chevron_right
मनुरु उवाच
सर्पान्कुशाग्राणि तथोदपानं; ज्ञात्वा मनुष्याः परिवर्जय़न्ति |  १४   क
अज्ञानतस्तत्र पतन्ति मूढा; ज्ञाने फलं पश्य यथा विशिष्टम् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति