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शान्ति पर्व
अध्याय १९४
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मनुरु उवाच
यथागुणं कर्मगणं फलार्थी; करोत्ययं कर्मफले निविष्टः |  २०   क
तथा तथाय़ं गुणसम्प्रय़ुक्तः; शुभाशुभं कर्मफलं भुनक्ति ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति