वन पर्व  अध्याय १९८

व्याध उवाच

न भक्षय़ामि मांसानि ऋतुगामी तथा ह्यहम् |  ३२   क
सदोपवासी च तथा नक्तभोजी तथा द्विज ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति