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शान्ति पर्व
अध्याय १९५
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मनुरु उवाच
शुभाशुभं कर्म कृतं यदस्य; तदेव प्रत्याददते स्वदेहे |  २२   क
मनोऽनुवर्तन्ति परावराणि; जलौकसः स्रोत इवानुकूलम् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति