शान्ति पर्व  अध्याय ३२४

युधिष्ठिर उवाच

यदा भक्तो भगवत आसीद्राजा महावसुः |  १   क
किमर्थं स परिभ्रष्टो विवेश विवरं भुवः ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति