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शान्ति पर्व
अध्याय १९५
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मनुरु उवाच
यथा च कश्चित्सुकृतैर्मनुष्यः; शुभाशुभं प्राप्नुतेऽथाविरोधात् |  ८   क
एवं शरीरेषु शुभाशुभेषु; स्वकर्मजैर्ज्ञानमिदं निवद्धम् ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति