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शान्ति पर्व
अध्याय २९५
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वसिष्ठ उवाच
मत्स्योऽन्यत्वं यथाज्ञानादुदकान्नाभिमन्यते |  २५   क
आत्मानं तद्वदज्ञानादन्यत्वं चैव वेद्म्यहम् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति