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वन पर्व
अध्याय १९५
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मार्कण्डेय़ उवाच
तमाविशत्ततो विष्णुर्भगवांस्तेजसा प्रभुः |  १२   क
उत्तङ्कस्य निय़ोगेन लोकानां हितकाम्यया ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति