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शान्ति पर्व
अध्याय २८५
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पराशर उवाच
उत्पाद्य पुत्रान्मुनय़ो नृपते यत्र तत्र ह |  १३   क
स्वेनैव तपसा तेषामृषित्वं विदधुः पुनः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति