उद्योग पर्व  अध्याय १९५

वैशम्पाय़न उवाच

तस्मादहमपीच्छामि श्रोतुमर्जुन ते वचः |  ७   क
कालेन किय़ता शत्रून्क्षपय़ेरिति संय़ुगे ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति