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आदि पर्व
अध्याय १९६
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कर्ण उवाच
मिषतः सर्वलोकस्य स्थास्यते त्वय़ि तद्ध्रुवम् |  २४   क
अतोऽन्यथा चेद्विहितं यतमानो न लप्स्यसे ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति