menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय १९६
chevron_left
chevron_right
मनुरु उवाच
यथा कोशान्तरं प्राप्य चन्द्रमा भ्राजते पुनः |  १७   क
तद्वल्लिङ्गान्तरं प्राप्य शरीरी भ्राजते पुनः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति