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शान्ति पर्व
अध्याय १९६
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मनुरु उवाच
यथा चन्द्रार्कनिर्मुक्तः स राहुर्नोपलभ्यते |  २२   क
तद्वच्छरीरनिर्मुक्तः शरीरी नोपलभ्यते ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति