वन पर्व  अध्याय १९६

वैशम्पाय़न उवाच

क्षत्रधर्मसमाचारं तथ्यं चाख्याहि मे द्विज |  १२   क
धर्मः सुदुर्लभो विप्र नृशंसेन दुरात्मना ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति