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शान्ति पर्व
अध्याय ३४५
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व्राह्मण उवाच
सम्प्राप्तस्यैव चाव्यग्रमावेद्योऽहमिहागतः |  ११   क
ममाभिगमनं प्राप्तो वाच्यश्च वचनं त्वय़ा ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति