आदि पर्व  अध्याय १९७

विदुर उवाच

दुर्योधनश्च कर्णश्च शकुनिश्चापि सौवलः |  २८   क
अधर्मय़ुक्ता दुष्प्रज्ञा वाला मैषां वचः कृथाः ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति