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शान्ति पर्व
अध्याय १९७
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मनुरु उवाच
अज्ञानतृप्तो विषय़ेष्ववगाढो न दृश्यते |  ५   क
अदृष्ट्वैव तु पूतात्मा विषय़ेभ्यो निवर्तते ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति