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शान्ति पर्व
अध्याय ९९
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इन्द्र उवाच
आहवे निहतं शूरं न शोचेत कदाचन |  ४३   क
अशोच्यो हि हतः शूरः स्वर्गलोके महीय़ते ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति