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शान्ति पर्व
अध्याय १९८
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मनुरु उवाच
गुणहीनो हि तं मार्गं वहिः समनुवर्तते |  १२   क
गुणाभावात्प्रकृत्या च निस्तर्क्यं ज्ञेय़संमितम् ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति