वन पर्व  अध्याय १९८

व्याध उवाच

धात्रा तु विहितं पूर्वं कर्म स्वं पालय़ाम्यहम् |  २०   क
प्रय़त्नाच्च गुरू वृद्धौ शुश्रूषेऽहं द्विजोत्तम ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति