वन पर्व  अध्याय १९८

व्याध उवाच

राजा प्रशास्ति धर्मेण स्वकर्मनिरताः प्रजाः |  २५   क
विकर्माणश्च ये केचित्तान्युनक्ति स्वकर्मसु ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति