menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १९८
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
इति सञ्चिन्त्य मनसा श्रद्दधानः स्त्रिय़ा वचः |  ४   क
वलाकाप्रत्ययेनासौ धर्म्यैश्च वचनैः शुभैः |  ४   ख
सम्प्रतस्थे स मिथिलां कौतूहलसमन्वितः ||  ४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति