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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८९
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युधिष्ठिर उवाच
तत्र हर्षकला वाचो नराणां शुश्रुवेऽर्जुनः |  १७   क
दिष्ट्यासि पार्थ कुशली धन्यो राजा युधिष्ठिरः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति