वन पर्व  अध्याय १९८

व्याध उवाच

आरम्भो न्याय़युक्तो यः स हि धर्म इति स्मृतः |  ७२   क
अनाचारस्त्वधर्मेति एतच्छिष्टानुशासनम् ||  ७२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति