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द्रोण पर्व
अध्याय १०२
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सञ्जय़ उवाच
ततः सुदर्शनं वीरं पुत्रं ते भरतर्षभ |  ९९   क
विव्याध समरे तूर्णं स पपात ममार च ||  ९९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति