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अनुशासन पर्व
अध्याय ३३
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भीष्म उवाच
पौरजानपदांश्चापि व्राह्मणांश्च वहुश्रुतान् |  ३   क
सान्त्वेन भोगदानेन नमस्कारैस्तथार्चय़ेत् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति