आदि पर्व  अध्याय १९९

वैशम्पाय़न उवाच

तत्त्रिविष्टपसङ्काशमिन्द्रप्रस्थं व्यरोचत |  ३५   क
मेघवृन्दमिवाकाशे वृद्धं विद्युत्समावृतम् ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति