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अनुशासन पर्व
अध्याय १३७
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अर्जुन उवाच
त्यजैनं कलुषं भावं व्राह्मणेभ्यो नमस्कुरु |  २२   क
एतेषां कुर्वतः पापं राष्ट्रक्षोभो हि ते भवेत् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति