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द्रोण पर्व
अध्याय १४९
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सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा ततः प्राय़ात्कर्णं प्रति जनेश्वर |  ३६   क
किरञ्शरशतांस्तीक्ष्णान्विमुञ्चन्कर्णमूर्धनि ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति