आदि पर्व  अध्याय २

सूत उवाच

ततोऽश्वमेधिकं नाम पर्व प्रोक्तं चतुर्दशम् |  २०६   क
तत्संवर्तमरुत्तीय़ं यत्राख्यानमनुत्तमम् ||  २०६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति