आदि पर्व  अध्याय २

सूत उवाच

स सत्कृत्य यदुश्रेष्ठं मातुलं शौरिमात्मनः |  २२४   क
ददर्श यदुवीराणामापाने वैशसं महत् ||  २२४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति