आदि पर्व  अध्याय २

सूत उवाच

स वृद्धवालमादाय़ द्वारवत्यास्ततो जनम् |  २२६   क
ददर्शापदि कष्टाय़ां गाण्डीवस्य पराभवम् ||  २२६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति