उद्योग पर्व  अध्याय ८७

वैशम्पाय़न उवाच

राजमार्गे नरा न स्म सम्भवन्त्यवनिं गताः |  ८   क
तथा हि सुमहद्राजन्हृषीकेशप्रवेशने ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति