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आदि पर्व
अध्याय २
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सूत उवाच
अर्जुनस्य वने वासः सुभद्राहरणं ततः |  ३८   क
सुभद्राहरणादूर्ध्वं ज्ञेय़ं हरणहारिकम् ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति